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Showing posts from September, 2010

नया तराना गाता हुं

आजकल लिखने के समय का अभाव हो रहा है, इसलिये आज वीर रस की एक पुरानी कविता प्रस्तुत कर रहा हुं, जिसे मैने अपने जिया-सराय के दिनों में लिखा  था।  




कागजके उजले पन्नों पर, इतिहासपुराना लिखता हुं।  घनघोर तमस के बीच पुन:, फ़िर नया तराना लिखता हुं।।१ 
भुजदण्डों में शक्ति नयी भर, पर्वत को आज हिलाता हुं।  चक्रव्युहको तोड झलक में, पथअपना स्वंय बनाता हुं।।२ 
इस बुझती चिंगारी से, लंका में में आगलगाता हुं।  जंगलगी जंजीर तोड, फ़िर नयी क्रांति मैं लाता हुं।।३ 
आसमान के तारे तोडुं, पत्थर को पिघलाता हुं।  घनघोर तमस के बीच पुन:, फ़िर नया तराना गाता हुं।।४
तूफ़ानों के बीचआजमैं, नावअकेले खेता हुं।  सागर की उडती लहरों से, हंस-हंसके टक्कर लेता हुं।।५
अंगारे भर इस मुठ्ठी में, काल को आज चिढाता हुं।  नहीं असंभव जग में कुछ, आओ तुम्हें दिखलाता हुं।।६
फ़ूल पडें या बिजली गिरती, ग्रहण लगे या धरती हिलती।

कुछ नहीं लिख पाया

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इस सप्ताह कुछ नहीं लिख पाया क्योंकि बचपन  का साथी संकल्प तिवारी (चिन्टु), मात्र पच्चीस वर्ष की आयु में,  एक होलीकाप्टर दुर्घटना में सदैव के लिये चला गया।  इंडियन एयर फ़ोर्स का यह होनहार पायलट, समय की होनहार से हार गया, और छोड गया अनगिनत यादें और बचपन के वो दिन।

कुछ ही दिन पहले संकल्प ने ढाका के बारे में भी कमेंट दिया था,



Gr8 wrk.. 'Dhaka' bhi padhi.. Lage raho inspector.. ;) ;)
मुझे क्या पता था कि ये चिन्टु का अंतिम कमेंट होगा मेरे ब्लाग में, अब तो बस पुरानी स्म्रतियां बार-बार  सजीव हो रही हैं। बचपन में वो साथ कामिक्स पडना, पतंग उडाना, क्रिकेट खेलना या फ़िर होली का रंग तैयार करना।
पहली बार लग रहा है कि शब्द कम पड रहे हों।

इस वीर सिपाही के माता-पिता को नमन जिन्होने अपने एकमात्र संतान को देश सेवा के लिये दान दे दिया। ईश्वर से यही प्रार्थना की अंकल-आंटी को इस दु;ख को सहने की  शक्ति दे। 
धन्य है संकल्प और धन्य है भारत भूमि जो ऐसे सपूतों  को जन्म देती है। 
श्रद्वांजलि उस कभी ना लौट के आने वाले एक सच्चे, वीर  भारतीय बेटे को। 







रावण की सीख (Tips)

श्रीराम को जैसे ही विभीषण ने बताया कि रावण कि नाभि में अम्रत है और उसी के कारण रावण अपराजेय है। तो प्रभु राम ने एक बाण छोडकर रावण की नाभि का अम्रतसुखा दिया और अगले ही बाण में रावण धराशायी होकररणभूमि में गिरपडा। यहदेखते ही सम्पूर्ण वानर दल में खुशी की लहर दौडपडी रावण के गिरने के साथ ही युद्धसमाप्त हो गया था स्वर्ग से देवता भी पुष्प वर्षा  करने लगे और पूरा वातावरण हर्ष से भर गया था। इसी प्रसन्नता के वातावरण के बीच भगवान राम ने लक्ष्मण से बोले,
भ्राता लक्ष्मण! सम्पूर्ण विश्व का शासक, परम शक्तिशाली, रावण आज रणभूमि में पडा अपनी म्रत्यु की प्रतीक्षा कर रहा है। रावण एक प्रराक्रमी योद्धा ही नहीं अपितु एक परम विद्वान भी था। ब्राह्मण कुल में जन्म लेकर उसने वेदों, नीति-शास्त्र और राजनीति का गहन अध्ययन किया है। इस बहुमुखी प्रतिभा और वीरता से ही तो उसने अपना राज्यप्रथ्वी से इन्द्रलोक तक विस्तार कर लिया था। वास्तव में रावण का जीवन अनुभवों का भंडार है। अत: मैं चाहता हुं कि तुम उसके देहावसान (म्रत्यु) होने से पहले ही शीघ्रही उसके पास जाओ और उससे कुछ सीख/ज्ञान(टिप्स) लेकर आओ, जो भविष्य में तुम्हारे बहु…

विद्यालय का एक संस्मरण

अभी-अभी याद आया कि आज शिक्षक दिवस है और एक बढिया अवसर है विद्यालय के एक संस्मरण को आपके साथ बांटने का।  
गुरुरानीजीनेपहलीबारसामनाकक्षा१० (ब) मेंहुआजबपहलीबारवोहमेंगणितपढानेंआये। उनका पूरा नाम श्री श्याम सुंदर गुरुरानी था। गठा हुआ शरीर, छोटा कद, लम्बी नाक, शिर में थोडे परन्तु बहुमत में सफ़ेद बाल, तेज चाल और सदैव मुस्कुराता चेहरा, गुरुरानी जी की पहचान थी। वे हमेशा उर्जा से भरे हुए रहते थे, बाद में पता चला कि उनकी इस उर्जा का स्त्रोत डाबर च्यवनप्राश था।  गुरुरानी जी से  पहले,कक्षानौमें,हमेंगणितश्रीबलरामप्रसादजीपढायाकरतेथेऔरबहुतबढियापढायाकरतेथेऔरडांटनाडपटनानहींकेबराबर, बडेहीखुशमिजाजव्यक्तिथे।परन्तुगुरुरानीजीकेबारेमे