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Showing posts from November, 2010

राजा रानी और बकरा

बातबहुतपुरानीहै।एकराजाथाजिसेएकमुनिनेप्रसन्नहोकरजानवरों, कीटपतंगोंऔरपक्षियोंकीबोलीसमझनेकावरदानदियाथा, लेकिनएकशर्तभीथीकियदिराजानेकिसीकोभीइसबारेमेंबतायातोराजाकीउसीक्षणम्रत्युहोजायेगी।
एकरातकीबातहैराजाअपनीरानीकेसाथरात्रीकाभोजनकररहाथा, अचानकराजानेदेखाकिदो

रावण या फ़िर रावन, सही क्या है?

कालिदास को संस्क्रत का महान कवि माना जाता है। कहते हैं कि पहले कालिदास एक जड मूर्ख थे और वहीं उनकी पत्नी बडी प्रकांड विद्वान। पत्नी के उलाहना देने पर कालिदास ने घर छोड के देवी सरस्वती की अराधना करनी आरंभकी, उनकी तपस्या से प्रसन्नहोकर माता काली ने उन्हें वरदान दिया कि वह सदैव उनकी जिह्वा में निवासकरेगीं, और तब से मूर्खकालिदास, महाकवि कालिदास हो गये।
कालिदास की विद्वता और पांडित्यसे प्रभावित होकर, राजा भोज ने इन्हें अपने दरबार में राजकवि की पदवी प्रदान की। यह वही राजा भोज हैं जिनके बारे में ये कहावत प्रसिद्धहै कि कहां राजा भोजऔर कहां गंगू तेली। जिसप्रकार अकबर और बीरबल की आपसी चुहलबाजी की कई कहानियां प्रसिद्धहैं उसी प्रकार राजा भोज और कालीदास के भी कुछ किस्से हैं, उनमें से एक मैं आगे लिखरहा हुं।
राजा भोजके दरबार के अन्य मंत्री, कालीदास से मन ही मन बहुत जलते, और हमेशा कालिदास को नीचा दिखाने के बहाने ढूंढते रहते थे, परन्तु कालिदास अपने चतुर दिमागसे हर बार बच जाते। इस बार दरबारियों ने एक नयी साजिश सोची, जिसके अनुसार किसी एक ढोंगी बाबा को खोजा गया जो नगर से दूर किसी गांवमें रहकर जनता को ठगता थ…