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कालिया गुण्डा

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अभी मैं नींद में ही था कि  अचानक मुझे अपने गालों  पर कुछ गीला-गीला सा लगा, मुझे बढ़ीअसहज सी हुई और मैंने कुछ गुस्से से आँखें खोली तो क्या देखा की काली कजरारी,  बड़ी -बड़ीआंखें मेरे बिलकुल निकट हैं और एक लम्बी सी गीली नाख मेरे चेहरे को लगातारखोद सा रही है।उस लम्बी सी नाख से निकलने वाली नम सांस मेरे चेहरे को जल वाष्प  की एक परत से ढक दे रही थी।
छिssss छीछीsssssss
मैं हड़बड़ी में अचानक से आंखें खोली, और क्या देखता हूँ  कि यहकालिया था जोमुझे अपनी गीलीनाखसे धक्के दे देकर जगा रहा था।एक बार तो मन करा कि  साले को एक लात मार के भगाऊँ, पर जैसे हीमैंने उसे भगाने कोलात उठायी तो वह मुझसे ज्यादा फुर्तीला निकला और बच गया।खिसिया हट मैं मैंने उसे फिर डरा  कर भगाने का प्रयास किया पर कालिया कहाँ मानने वाला था, वो थोड़ा दूर जाकर अपने अगले दोनों पैरो पर झुककर खेलने की मुद्रा में  आ गया।अब तक मेरी नींद  तो जा चुकी थी पर आंखें पूरी तरह खुलने को तैयार नहीं थी सो मैंने अपने गीले गाल को अपनी कमीज की बांह पर पोंछते  हुए हार मानी और लेटे-लेटे अधखुली आँखों से कालिया को नजदीक बुलायाऔर कालिया फट  से मेरे नजदीक आ गया. कालिय…