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आज़ादी ही कुछ और है (व्यंग्य कविता)

रोज दफ्तरों के चक्कर लगाने की  चपरासी को भी ‘सर’ कह कर बुलाने की
अंततः जेब गरम कर के काम करवाने की
फिर भी ईमानदार भारतीय कहलाने की
आज़ादी ही कुछ और है|१
काला धन कमाने की
खाने में जहर मिलाने की
बेईमान को सीना तान के चलने की
ईमानदार हो? तो डर के रहने की
आज़ादी ही कुछ और है|२
कन्या भ्रूण हत्या की
महिला के यौन शोषण की
सामूहिक बलात्कार करने की
और फिर बहन से राखी बंधवाने की
आज़ादी ही कुछ और है|३
पेट में चाकू भौंकने की
चेहरे कोतेज़ाब से छोंकने की
चलते को दिन दहाड़े लूटने की
और लुटते पिटते को शान्ति से देखने की
आज़ादी ही कुछ और है|४
पानी मोटर से खींचने की
बिजली का मीटर रोकने की
घर का कूड़ा सड़क पर फेंकने की
और फिर सरकार को कोसने की
आज़ादी ही कुछ और है|५
पंचायत बिठाने की
प्रेमियों को लटकाने की
बहु से दहेज मंगाने की
नहीं तो शमशान तक पहुंचाने की
आज़ादी ही कुछ और है|६
भ्रष्टाचार करने की
गलत देख मूक बनने की
बिना टिकट यात्रा करने की
फिर विंडो सीट के लिए झगड़ने की
आज़ादी ही कुछ और है|७

पैसे से काम करवाने की
नकली डिग्रियां बंटवाने की
वोट के बदले नोट दिलवाने की
और फिर भी माननीय कहलाने की
आज़ादी ही कुछ और है|८
गरीब क…

छब्बीस जनवरी अमर रहे

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स्कूल में एक दिन पहले बताया जाता था, कि कल छब्बीस जनवरी हैं और इस उपलक्ष्य में प्रभात फेरी निकाली जायेगी। प्रभात फेरी विद्यालय के नियमित समय से थोड़ा पहले, अँधेरे में ही निकाली जाती थी।अतः केवल बड़ी कक्षा  के विद्यार्थियों को ही इसमें अनिवार्य रूप से उपस्थित होना आवश्यक  होता था।घर पहुंचकर हमारापहला काम प्रभात फेरी के लिए झंडा बनाना होता था। कला (आर्ट) की कापी से एक पन्ना उखाड़ कर उसमें झंडा  बनाया जाता था और उसमें पानी-वाले  मिट्टी के रंग भरे जाते।  सींकवाले झाड़ू का सबसे मजबूत सींकनिकाल कर उसे झंडे का डंडा बनाया जाता और प्रभात फेरी के लिए तिरंगा तैयार। मुझे याद है कि  कुछ ऐसे नमूने भी होते थे जो एक चबूतरे परलहरातेहुए तिरंगेका चित्र बनाते और फिर उस चित्र को एक डंडे पर लगा कर विद्यालय आते थे।  

छब्बीस जनवरी की सुबह निर्मल और मैं सवेरेही उठकर, नहा-धोकर सफ़ेद कपडे पहन प्रभात फेरी के लिए विद्यालय को निकल जाते थे।आश्चर्य की बात होती थी कि जिस उत्साह से हम छब्बीस जनवरी मनाने के लिए विद्यालय की और बढ़ते, वह उत्साह रास्ते में दिखने वाले किसी भी व्यक्ति में  नहीं दिखाई देता था। ऐसा लगता कि  वास्तव म…