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ढाका भाग ५: साईकिल, अमरुजाला और शिवजी

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पिछला भाग: ढाका भाग ४:ढाका की साईकिल
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कैंपा कोला की बोतल खत्म करने के बाद, ढाका ने खाली बोतल मुझे थमाते हुए दुकानदार को दे आने को कहा। दुकानदार को बोतलदेने से पहले मैने एक बार बोतल को इसआशासे फ़िर अपने मुंहपर उडेला कि क्या पता कुछ बची हुयी हो। बोतल को थोडी देर तक अपने मुंहके ऊपर उलटा कर हिलाने के बादबची-खुची दो बूंदें मेरे मुंहमें आ गिरी। इन अंतिम दों बूंदों का स्वादतो मुझे कुछ ज्यादा ही अच्छा लगा था, हां वह बात दूसरी थी कि यह भी डर लग रहा था कि कहीं डकार यदि मुंहसे आ गयी तो दांतना कमजोर हो जायें। मैने ढाका से कहा कि यदि अगली बार पीये तो मुझे भी बुलाना यार।
अंतत:, कैम्पा-कोला पान के बादहम लोगवापसउद्दा की दुकानपर लौटे और ढाका की साईकिल लेकर हम वापसघर की ओर जाने लगे थे। तब ढाका ने साईकिल में कैंची चला के दिखायी और तब मुझे समझमें आया कि वो किस कैंची की बात कर रहा था।


जैसा कि दिखाये गये चित्रमें देखसकते हैं कि पुरुषों की साईकिल में बैठने वाली गद्दी और साईकिल के हैंडल के बीच एक डंडा लगा होता है। इस डंडे के कारण, यदि आपके पांव छोटे हैं या फ़िर साईकिल बहुत उंची (तीस-बत्तीसइंचवाली) ह…

ढाका भाग ४: ढाका की साईकिल

यदि आपने ढाका के पुराने भाग नहीं पडे हैं, तो पिछले भाग में जाने के लिये यहां क्लिक करें। ढाका भाग ३

मैंअपनाहोमवर्कपूराकररहाथाकितभीबाहरसेआवाजसुनायीदी,
चूssडीलेलो, चूsssडी चूssडीलेलो, चूsssडी
यहसुनतेहीमैनेझटसेकापी-किताबबंदकियेऔरखिडकीकीओरलपका।मैंसमझगयाकिबाहरढाकाआगयाहै, येउसकामुझेऔरटैंटुकोखेलनेबुलानेकानयाकोडवर्ड